"शिमला: पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता की शिकायत पर अधिवक्ता विनय शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज"
BREAKING
मुख्यमंत्री द्वारा स्वास्थ्य योजना की प्रगति की समीक्षा; कहा, स्वास्थ्य संभाल योजना पंजाब के लिए वरदान बनकर उभरी मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने 'मुख्यमंत्री मांवा-धीयां सत्कार योजना' की शुरुआत की तैयारियों का लिया जायजा; योग्य लाभार्थी महिलाओं को पहली जुलाई से मिलेगी वित्तीय सहायता माननीय रेल मंत्री ने किया गुड़गांव रेलवे स्टेशन का निरीक्षण , कामगार दशरथ कुमार को दिलाया अमृत भारत एक्सप्रेस का टिकट "रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शकूरबस्ती डिपो का निरीक्षण किया, हाइड्रोजन ट्रेन और आधुनिक मेंटेनेंस सुविधाओं का जायजा" रेलमंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने शकूरबस्ती डिपो के कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ से किया सौहार्दपूर्ण वातावरण में सीधा संवाद

"शिमला: पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता की शिकायत पर अधिवक्ता विनय शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज"

fir-(1)-1780666674888_v

Shimla: FIR registered against Advocate Vinay Sharma

Shimla: FIR registered against Advocate Vinay Sharma, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता की शिकायत पर अधिवक्ता विनय शर्मा के खिलाफ शिमला पूर्व थाना में एफआईआर दर्ज होने से प्रशासनिक और कानूनी हलकों में हलचल मच गई है।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 248, 351 और 356(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इनमें धारा 351 को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध बताया गया है, जिसके चलते मामले में गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।

एफआईआर के अनुसार, पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने आरोप लगाया है कि विनय शर्मा द्वारा 24 मार्च 2026 को दायर की गई शिकायत में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत, भ्रामक और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की मंशा से लगाए गए थे। शिकायत में भूमि खरीद, बेनामी संपत्ति, पद के दुरुपयोग, आय के स्रोत, भूमि के अवमूल्यन तथा प्रशासनिक हस्तक्षेप जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।

पूर्व मुख्य सचिव ने अपनी शिकायत में कहा है कि भूमि खरीद से संबंधित सभी आवश्यक अनुमतियां और जानकारियां नियमानुसार संबंधित विभागों और सरकार को समय पर उपलब्ध करवाई गई थीं। उनका कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोप सरकारी रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों के विपरीत हैं।

एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई जांच में भी शिकायत को तथ्यहीन, कानूनी रूप से अस्थिर और दस्तावेजी साक्ष्यों से असमर्थित पाया गया। शिकायत में लगाए गए आरोपों का समर्थन करने वाला कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं मिला।

पूर्व मुख्य सचिव ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकारी पत्राचार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को जानबूझकर आपराधिक गतिविधियों के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया, जबकि उपलब्ध अभिलेख ऐसे आरोपों की पुष्टि नहीं करते। उनके अनुसार, इस तरह के आरोपों से न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा बल्कि संवैधानिक पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच की जिम्मेदारी सहायक उपनिरीक्षक रूप लाल को सौंपी गई है। पुलिस अब शिकायत, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी।

यह मामला सामने आने के बाद प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।